पानी हमारे जीवन के लिए सबसे जरूरी। इसके बिना हम अपने जीवन की कल्पना नहीं कर सकते हैं। लेकिन आज बढ़ते जल दोहन और पानी के व्यर्थ उपयोग ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई क्षेत्रों में पानी की इतनी किल्लत है कि लोगों को एक एक बूंद के लिए तरसना पड़ रहा है। कई कई दिनों बाद उनके घरों में थोड़ा बहुत पीने लायक पानी मिल पा रहा है। राजस्थान के कुछ इलाकों की तस्वीरें आपने जरूर ही देखी होंगी, जिसमें पानी के लिए कई कई किलोमीटर तक दूर जाना पड़ता है, जहां घंटों की मशक्कत के बाद एक बाल्टी पानी नसीब हो पाता है। हाल में चेन्नई में पानी की किल्लत तो समाचार पत्रों एवं टीवी पर आपने खब ही सुना और देखा होगा कि कैसे इस शहर में पानी की समस्या से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। लेकिन जिन क्षेत्रों में अभी पानी की किल्लत उतनी नहीं बढ़ी है या भूजल स्तर उस स्तर तक नहीं गिरा है कि कोई ज्यादा मुश्किल देखने को मिल रहा हो। ऐसे क्षेत्रों में पानी के मोल को कोई समझता ही नहीं है। सड़क से लेकर गाड़ी तक खुलेआम धोए जाते हैं। जहां पर पानी जरूरत एक लीटर की होती है, वहां बीसियों लीटर से ज्यादा पानी बिना किसी मंशा के बरबाद कर दिया जाता है। व्यर्थ में ही बहा दिया जाता है। बहरहाल पानी की कुछ ऐसी बातें भी हैं, जिन्हें हम आमतौर पर नहीं जानते या गौर नहीं करते। इसी सब्जेक्ट पर इस लेख में प्रकाश डालने की कोशिश की गई है।
हम सभी जानते है कि पानी अनमोल है इसे बनाया नहीं जा सकता है। सिर्फ पानी की बात होती तो कुछ और ही मसला होता, लेकिन क्या हर पानी को हम उपयोग कर सकते हैं। जवाब है नहीं। हमें सबसे ज्यादा जरूरत होती है शुद्ध पानी की। सुरक्षित और शुद्ध पानी के अलावा साफ सफाई और सुरक्षित शौचालीय तक इससे खास तौर पर जुड़े हुए हैं। सुरक्षित शौचालय होंगे तो पर्यावरण पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा और बहुत से दिक्कतें दूर होंगी। ऐसे में साफ और शुद्ध पानी, साफ सफाई और स्वच्छा आज हमारे लिए क्यों इतना महत्वपूर्ण है इसको जानते हैं।
वर्तमान में जल संकट बेहद तेजी से बढ़ रहा है। कई सालों से इस पर लोगों को जागरूक किया जा रहा है, लेकिन अभी भी इस ओर कम ही लोग गंभीरता का परिचय देेते हैं। जहां पर सबमर्सिबल पंप्स लगे हैं, अक्सर उन घरों में शेविंग करने एवं नहाने जैसे कार्याें में जरूरत से कई गुना ज्यादा शुद्ध पानी को बेमतलब ही बहा दिया जाता है। इसपर भी कोई रोकने एवं टोकने वाला नहीं मिलता है। पूछने पर जवाब भी एक से बढ़कर एक मिलते है।
1. जल संकट की समस्या कितनी बड़ी है। इसका अंदाजा आपकों अक्सर अखबारों एवं अन्य मीडिया के माध्यम से मिलती ही होगी। क्या आपको पता है कि दुनिया भर में कितने लोगों को पीने के लिए शुद्ध एवं सुरक्षित पानी मिल पाता है। अधिकतर का जवाब नहीं में ही होगा। क्योंकि हमें इससे क्या लेना देना है। आपको बता दें कि दुनिया भर में लगभग 2 अरब 2 सौ करोड़ लोगों को आज भी सुरक्षित पानी नसीब नहीं हो पाता है। उन्हें असुरक्षित पानी पर निर्भर रहना पड़ता है। पानी का उचित उपयोग करिए, नहीं तो एक दिन हमें भी ये दिन देखना पड़ सकता है।
2. हम सभी को पीने के लिए पानी की जरूरत तो हर हाल में रहती ही है। हम पानी पिए बिना नहीं सकते। लेकिन इसके लिए पानी का स्वच्छ होने के अलावा इसे सुरक्षित भी होना चाहिए। सुरक्षित पानी से हमारा आशय ये है कि हमें जब आवश्यक हो तब हमें आसानी से पानी मिल जाए। हमारे घरों में सुरक्षित पेयजल हो, जो तमाम तरह की अशुद्धियों से मुक्त हो।
3. स्वच्छता एवं साफ सफाई के बिना बीमारियां बेहद तेजी से अपना प्रसार करती हैं। इससे हमें सुरक्षित स्वच्छता का उपयोग कर बचना होगा। दुनिया भर में अरबों लोग आज भी ऐसे माहौल में जीवन यापन करने को विवश हैं, जहां सुरक्षित स्वच्छता के उपाए नहीं है। ऐसे में बीमारियां उनके यहां हमेश दस्तक देने को तैयार बैठी रहती हैं। आज के समय में हमारे पर साफ सफाई के तमाम संसाधन हैं। इसके बाद भी गंदगी की भरमार अक्सर देखने को मिलती है। जिसे लेकर हम कोई खास प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं करते। बस जो चल रहा है, चलने दो। इससे काम नहीं चलेगा। क्या आपको पता है कि दुनिया भर में लगभग 4 अरब 2 सौ करोड़ लोग, जो पूरी दुनिया की आबादी के आधे से अधिक हैं को सुरक्षित स्वच्छता नहीं मिल पाती है। न ही उनके पर सुक्षित स्वच्छता ही पहुंच पाती है। इसका आशय ये भी है कि कि शौचालय जो कि इंसानों को गंदगी और अपशिष्ट से अलग करती है, का हम कितना उपयोग करते है। वो भी सुरक्षित तरीके से, न कि खुले में शौच जाकर। इससे ये भी समझा जा सकता है कि हमे कचरे का निपटान करने को लेकर किनते सजग हैं और और कचरे का कितना सुरक्षित निपटान करते हैं। ऐसा नहीं करते हैं तो रोगों को हम तक पहुंचने में ज्यादा देर नहीं लगेगी। गंदगी बीमारियों का घर ही समझा जाता है।
4. एक दशक पहले तक ज्यादातर लोग खुले में शौच ही ज्यादा करते थे। खासकर ग्रामीण इलाकों में। लेकिन अब इसमें बदलाव आ रहा है। लोग जागरूक हुए हैं और खुले में शौच से तौबा कर रहे हैं। लेकिन अभी भी खुले में शौच करने वालों की संख्या पर गौर करें तो पता चलेगा कि परिस्थियां अभी भी गंभीर ही बनी हुईं हैं। क्या आपको पता है कि विश्व भर में लगभग 673 मिलियन लोग अभी भी खुले में शौच ही करते हैं। कभी कभी जब आप रेलवे से सफर करते होंगे तो रेल पटरियों के किनारे या जब किसी गांव या शहर के ग्रामीण क्षेत्रों से गुजरते होंगे तो सड़क के किनारे या खेतों में लोग दिखते ही होंगे, जो खुले में ही शौच करते हैं।
5. पानी से होने वाली बीमारियों से सबसे ज्यादा खतरा किसे होता है। बच्चों को। क्या आप जानते हैं है कि प्रतिदिन 7 सौ से ज्यादा बच्चे सिर्फ असुरक्षित पानी, अस्वच्छता से होने वाली बीमारियों जैसे, दस्त से दुनिया छोड़कर चले जाते हैं।
6. दुनिया में कई देश गरीबी का दंश झेल रहे हैं। कई देश अभी बेहद ही कम विकसित हैं। इन देशों में गंदे हालात में बच्चों की डिलीवरी करने की विवशता अभी भी बनी हुई है। जो कि बेहद ही चिंताजनक बात है। दुनिया में जो देश कम विकसित हैं, उन देशों में 17 मिलियन महिलाएं अपर्याप्त पानी, साफ सफाई के अभाव वाले जगहों या अस्पतालों में बच्चों को जन्म देती हैं। इन हालात में महिलाओं, बच्चों को संक्रमण, बीमारी या मृत्यु की आशंका लगातार बनी रहती है।
7. बीमारियों को रोकना अभी मुश्किल काम बना हुआ है। जबकि अबतक बीमारियों से बचने के बेहतर उपाए हो जाने चाहिए थे। लेकिन अभी तक कमियां बनी हुई हैं। बीमारियों से बचने के लिए सबसे पहला उपाए साबुन से हाथ धोना ही होता है। लेकिन इसमें भी अक्सर लोग कोताही बरतते हैं। बच्चों को लेकर तो इसके प्रति कम ही जागरुकता दिखती है। जबकि बीमारियों को दूर भगाने के लिए यह सबसे आसान एवं प्रभावी तरीकों में से एक है। क्या आपको पता है कि दुनिया में लगभग 3 अरब लोग आज के समय में भी घर पर हाथ धोने के लिए साबुन और पानी के साथ अन्य जरूरी सुविधाओं से वंचित हैं या उपयोग नहीं कर पाते हैं। जबकि ऐसे लोगों की संख्या
दुनिया की कुल आबादी के एक तिहाई से भी ज्यादा हैं।
8. जलवायु परिवर्तन का नाम तो सुना ही होगा। टीवी, अखबार, रेडिया, पोस्टर, बैनर आदि पर इस समय इसका अक्सर जिक्र किया जाता है। जलवायु परिवर्तन का खतरा लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान में हालात नहीं सुधारे गए तो आगे यह और भी विकराल समस्या के रूप में हमारे सामने होगा। जलवायु परिवर्तन का असर पानी पर भी पड़ रहा है। सूखा, बाढ़ की समस्या तो इसके चलते हम देख ही रहे हैं। जलवायु परिवर्तन के चलते जल स्रोतों पर भी काफी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसे जल स्रोत दूषित होते जा रहे हैं। क्या आपको पता है कि 2040 तक दुनिया भर के 600 मिलियन बच्चे पानी के अभाव वाले क्षेत्रों में रहेंगे, जहां पानी के लिए बेहद मारामारी होगी। इसके लिए हमें अभी से सतर्क होकर पानी के सदुपयोग पर ध्यान देना चाहिए। ऐसा न होकि देर हो जाए और हमारी आने वाली पीढ़ियां पानी के लिए मारी मारी फिरें।
9. ग्रामीण इलाकों को आप समझते होंगे कि यहां पानी की समस्या रहती ही नहीं है। पानी की समस्या तो बड़े शहरों तक ही सीमित है। ऐसा बिलकुल नहीं है। स्थिति इसके ठीक विपरीत है। पानी की अधिकतर समस्या तो ग्रामीण इलाकों में ही है। क्या आपको पता है कि दुनिया में प्रति 10 में से 8 लोग जिनके पीने के पानी की कमी बनी हुई है, वो ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं। अपने गांव में पानी बचाने की कवायद शुरू करिए, नहीं तो आने वाले वक्त में समस्याएं बढ़ेंगी ही।
10. हम सभी को सुरक्षित व स्वच्छ पानी के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए। घरों में पानी की उपलब्धता के साथ साथ इसका सदुपयोग करने पर ध्यान देना चाहिए। सभी लोगों के पास पानी की उपलब्धता हो और लोग साफ सफाई वाले माहौल में रहें इसको लेकर गंभीरता से कदम उठाने चाहिए। एक व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि सभी को एकजुट होकर सुरक्षित पानी, साफ सफाई, स्वच्छता के लिए आगे आना चाहिए। ताकि सभी को पीने का शुद्ध पानी नसीब हो और साफ सफाई, स्वच्छता से भरा माहौल मिल सके।

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