पर्यावरण को सहेजना हमारा कर्त्तव्य है। इसेे नुकसान पहुंचाने वाले कारकों की भीड़ बढ़ रही हैं। पेड़ कम हो रहे हैं । बचपन में हम जहां पेड़ देखते थे। अब कंक्रीट के जंगल नजर आते हैं। कम ही जगहों पर पहले की तरह पेड़ पौधे दिखते हैं। हम पर्यावरण के प्रति जागरूक नहीं होंगे तो आने वाली पीढ़ियों को कई संकटों का सामना करना पड़ेगा। पेड़ों की कटाई और बढ़ते औद्योगीकरण ने हवा और पानी को प्रदूषित कर दिया है। इससे पृथ्वी के जीवों के लिए खतरा बढ़ा है। प्रकृति के प्रति असंवेदनशीलता हमारी मुश्किलों को बढ़ाएगा। या यूं कहें हम जिस डाली पर बैठें हैं, उसे ही काट रहे हैं।
जलवायु परिर्वतन का सर्वाधिक खामियाजा गरीबों को ही भुगतना पड़ेगा। क्योंकि प्रदूषित पर्यावरण के प्रभाव से होने वीली बीमारियों एव अन्य समस्याओं का सामना करने में यह वर्ग शायद संसाधानों की कमी की वजह से पिछड़ जाएगा। बहरहाल पर्यावरण, पारिस्थितिकी, जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन से संबंधित कई समस्याएं हमारे सामने है। इन्ही मुद्दों को लेकर आगे जानकारी देने का प्रयास होगा। गंभीर समस्याओं के साथ ही, नई तकनीकों एवं पर्यावरण हितैषी विकास व इसके लिए हो रहे प्रयास एवं गतिविधियों पर फोकस रहेगा। जीव जंतुओं की स्थिति व संरक्षण को लेकर भी जानकारी देने की कोशिश होगी।

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